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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप केस की सर्वाइवर के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की सज़ा को सस्पेंड करने की याचिका ख़ारिज कर दी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़ अप्रैल 2018 में, नाबालिग़ रेप सर्वाइवर का परिवार कोर्ट की सुनवाई के लिए उन्नाव गया था, जब दिनदहाड़े अभियुक्त व्यक्तियों ने उनके पिता पर हमला किया था.
इसके अगले ही दिन, पुलिस ने उनके पिता को अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था. उन्हें लगी कई चोटों के कारण पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी.
अगस्त 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पांच केसों का ट्रायल, जिसमें सर्वाइवर के पिता की मौत से जुड़ा केस भी शामिल था, उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफ़र कर दिया था.
दिसंबर 2019 में सेंगर को रेप का दोषी पाया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई.
सेंगर को 4 मार्च, 2020 को सर्वाइवर के पिता की मौत की साज़िश रचने का भी दोषी ठहराया गया और जून 2024 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सेंगर की सज़ा निलंबित करने की अपील ख़ारिज कर दी थी.
सोमवार को सेंगर की जिस याचिका पर सुनवाई हुई, यह राहत पाने की सेंगर की दूसरी कोशिश थी.
सेंगर की याचिका ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने सेंगर की याचिका ख़ारिज करते हुए सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड और मामले में कोई नया डेवलपमेंट न होने की बात कही.
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि हालांकि सेंगर ने इस मामले में करीब 7.5 साल जेल में बिताए हैं, लेकिन यह भी कहा कि कई वजहों से सेंगर की अपील पर सुनवाई नहीं हो पाई. कोर्ट ने कहा कि इसमें एक वजह सेंगर की ओर से सज़ा सस्पेंड करने के लिए कई आवेदन दायर करना भी है.
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीज़न बेंच ने उन्नाव रेप केस में सेंगर की सज़ा को सस्पेंड कर दिया था. हालांकि, कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी.
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