27.1 C
New Delhi
Thursday, August 6, 2026

जयराम रमेश के आरोपों पर वित्त मंत्री का जवाब, कहा- अफवाह फैलाने से पहले इन चीज़ों पर ध्यान दें – BBC News हिंदी

Must read

James Y. Falcon
James Y. Falconhttps://scribbledpage.com
James Y. Falcon is a digital journalist and long-form content strategist covering global sports, entertainment, education, and trending world affairs. With a strong focus on search-driven news and audience behavior, his work blends real-time trend analysis with clear, contextual reporting. James specializes in breaking down fast-moving topics—ranging from international football and franchise cricket to exam updates and pop-culture shifts—into accurate, reader-friendly narratives. His articles are designed to help readers understand not just what is happening, but why it matters in a rapidly changing digital landscape. When not tracking global trends or analyzing search data, James focuses on refining long-form journalism for modern platforms, with an emphasis on clarity, credibility, and reader trust.

Stay updated with the latest news.
This article covers the latest updates on जयराम रमेश के आरोपों पर वित्त मंत्री का जवाब, कहा- अफवाह फैलाने से पहले इन चीज़ों पर ध्यान दें – The MediaNews हिंदी.
Brought to you by our news desk, this report provides the essential context.
Dive into the detailed report.

भागवत

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, मोहन भागवत ने कहा कि जेन-ज़ी और जेन-अल्फा की सोच पहले की पीढ़ियों से अलग है (फ़ाइल फ़ोटो)

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और बातचीत को लेकर मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी सहमति बनाने का एक तरीका है.

मोहन भागवत ने कहा, “लोकतंत्र में विरोध भी सहमति बनाने का एक माध्यम है. अलग-अलग विचार सामने आते हैं और चर्चा के बाद एक सहमति बनती है. यह चर्चा संवाद के जरिए हो सकती है. अगर किसी वजह से बात नहीं सुनी जाती है तो आंदोलन किया जा सकता है. लेकिन इसका उद्देश्य सहमति बनाना होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना.”

उन्होंने कहा, “जहां तक जेन-ज़ी की बात है, हाल में जो हुआ, उसमें उनकी शिकायतें जायज़ हैं. भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है और वह नहीं हो पा रहा है, इसलिए ये मुद्दे उठ रहे हैं. निश्चित रूप से संवाद होना चाहिए.”

“मैं यह कह रहा हूं कि अगर जेन-ज़ी विरोध-प्रदर्शन कर रहा है, तो वे देश-विरोधी नहीं हैं. वे हमारे अपने हैं. वे हमारी अगली पीढ़ी हैं. बातचीत के साथ-साथ, अपनापन महसूस कराने की भी ज़रूरत है.”

भागवत ने कहा कि जेन-ज़ी और जेन-अल्फा की सोच पहले की पीढ़ियों से अलग है.

उन्होंने कहा, “जब हम उनकी उम्र के थे तो बड़ों की बात मान लेना हमारी आदत थी, हम सवाल नहीं करते थे. लेकिन आज जेन-ज़ी और जेन-अल्फा सवाल करते हैं, वे तर्कसंगत जवाब चाहते हैं.”

उन्होंने लोकतंत्र में बहस की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा, “अंग्रेजी में इसे डिबेट कहते हैं और हम इसे शास्त्रार्थ कहते हैं. इसमें दो पक्ष होते हैं- पूर्वार्ध और उत्तर. हर पहलू को देखा जाता है और हर व्यक्ति का अपना नज़रिया होता है. इससे किसी भी विषय के नए पहलू सामने आते हैं. कई विचार और प्रतिविचार मिलकर सत्य की पूरी तस्वीर बनाते हैं. यह प्रक्रिया होनी चाहिए.”

आरएसएस प्रमुख ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि जेन-ज़ी को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध कैसे और किस तरह किया जाए, इसके तरीके तय हैं. संविधान बनाने वालों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के भाषणों में भी इसके संकेत मिलते हैं. हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी समझना होगा कि जेन-जी सिर्फ विरोध के लिए आवाज नहीं उठा रही है. वे कुछ समस्याओं के कारण अपनी बात रख रहे हैं और उन समस्याओं का समाधान होना चाहिए. आंदोलन किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए होना चाहिए.”

Disclaimer: This content is automatically syndicated from external news feeds for informational purposes.
The views held in this article are the author’s own and do not necessarily reflect those of this website.

Source: Click here to read the full original article

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article