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इमेज स्रोत, SGPC
अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने सोमवार को पंजाब सरकार को बेअदबी क़ानून से जुड़ी आपत्तियां एक महीने के भीतर दूर करने का निर्देश दिया.
यह निर्देश अमृतसर में अकाल तख़्त की ओर से बुलाए गए कार्यक्रम में पंजाब के सभी सिख विधायक और कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में दिया गया.
बीबीसी पंजाबी के मुताबिक़, जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि क़ानून को लेकर जो भी आपत्तियां थीं, उन्हें दूर करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है.
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि सरकार एक महीने के भीतर विधानसभा का सत्र बुलाकर इस क़ानून में संशोधन करेगी.”
अकाल तख़्त पर विधायकों को संबोधित करते हुए गरगज ने कहा, “सरकार धार्मिक मामलों में दख़ल न दे.”
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, अकाल तख़्त सचिवालय में पेश होने के बाद बाहर आए और कहा कि जो भी चर्चा हुई है, उसे सरकार के सामने विचार के लिए रखा जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अकाल तख़्त ने पहले ही राज्य सरकार से कहा था कि इस क़ानून की कुछ धाराएं ‘गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत की भावनाओं के ख़िलाफ़’ हैं, इन्हें हटाया जाए.
क्या है मामला
दरअसल, 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा ने “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026” सर्वसम्मति से पास किया.
इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान है, जिसमें उम्रक़ैद भी शामिल है.
जत्थेदार गरगज ने इस मीटिंग से ठीक पहले आप सरकार पर धार्मिक मामलों और अकाल तख़्त की सत्ता में दख़ल देने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि पार्टी इस क़ानून के ज़रिए गुरु और सिखों के बीच आने की कोशिश कर रही है.
गरगज ने कहा, “हमें गुरु पंथ और गुरु ग्रंथ साहिब के ख़िलाफ़ नहीं जाना चाहिए. हमें सिख पंथ की भावनाओं के अनुसार चलना चाहिए.”
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