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This article covers the breaking situation concerning अनंत सिंह को दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में ज़मानत, उनके वकील ने क्या बताया? – The MediaNews हिंदी.
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इमेज स्रोत, Arijit Sen/Hindustan Times via Getty Images
कर्नाटक ने विधानसभा में ‘झूठी शान’ और ‘जाति आधारित हिंसा के ख़िलाफ़’ एक विधेयक पेश किया है. इस विधेयक का नाम ‘कर्नाटक फ़्रीडम ऑफ़ चॉइस इन मैरिज एंड प्रिवेंशन एंड प्रोहिबिशन ऑफ़ ऑनर एंड ट्रेडिशन बिल, 2026’ है.
बिल में बताया गया है कि अगर इस तरह के अपराध में किसी की मौत होती है तो कम से कम पांच साल की जेल होगी.
यह सज़ा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सज़ा से अलग होगी. अगर किसी कपल या व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाई जाती है तो तीन साल की जेल और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना होगा.
यह विधेयक उस घटना के लगभग तीन महीने बाद पेश किया गया है, जिसमें 21 साल की मान्या पाटिल की उसके पिता और रिश्तेदारों ने हत्या कर दी थी. वजह थी कि उसने अनुसूचित जाति समुदाय के विवेकानंद डोड्डामणि से शादी की थी.
मान्या छह महीने की गर्भवती थी. वह 21 दिसंबर 2025 को अपने मायके गई थी, तभी उन्हें पीटा गया. इससे पहले उन्होंने और विवेकानंद ने पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी.
विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि कर्नाटक में जाति आधारित भेदभाव अब भी मौजूद है और यह हिंसा के रूप में सामने आता है, ख़ासकर उन युवाओं के खिलाफ जो अपनी पसंद से अंतरजातीय विवाह करते हैं.
मसौदे में लिखा है, “हत्या, हमला और धमकी जैसे अपराध बीएनएस में दंडनीय हैं, लेकिन ये प्रावधान जाति की ‘इज़्ज़त’ बचाने के नाम पर होने वाले ख़ास सामाजिक अपराधों को ठीक से नहीं रोकते.”
कानून मंत्री एच.के. पाटिल ने बीबीसी हिन्दी से कहा, “इस विधेयक को ‘एवा नम्मवा एवा नम्मवा’ नाम दिया गया है. यह 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर की कही हुई बात है.”
समाज सुधारक बसवेश्वर के कथन का मतलब है- “वह हमारा है, वह हमारा है.” यानी हर इंसान अपना है, चाहे उसकी जाति या पृष्ठभूमि कुछ भी हो.”
जनवादी महिला संगठन की विमला केएस ने इस विधेयक का स्वागत किया.
उन्होंने कहा, “मैं पिछले 25 साल से केंद्र सरकार से ऐसे कानून की मांग कर रही हूँ. सुप्रीम कोर्ट की वकील कीर्ति सिंह ने इसका एक मसौदा भी तैयार किया था लेकिन चुनावी कारणों से कोई क़दम नहीं उठाया गया. अब इसे पूरी तरह लागू करना होगा.”
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