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इमेज स्रोत, ANI
भारत की अर्थव्यवस्था की अप्रैल-जून 2026
तिमाही में 7.8% की दर से बढ़ने के सरकारी दावे पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.
पार्टी के बयान में जीडीपी के आंकड़ों को बढ़ा चढ़ा कर पेश किए जाने का आरोप लगाया गया है.
बयान में कहा गया है कि इन आंकड़ों
में बेस ईयर की समस्या है.
पार्टी का आरोप है कि 2025 की पहली तिमाही
के पिछले आंकड़े को चार बार संशोधित किया गया. इसे करीब 86 लाख
करोड़ रुपये से घटाकर करीब 80 लाख
करोड़ रुपये कर दिया गया है.
बयान के अनुसार, “पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की गणना के
मुताबिक, अगर बेस ईयर के आंकड़े को इस तरह
नीचे संशोधित नहीं किया गया होता, तो इस
तिमाही की नॉमिनल ग्रोथ 10.3% नहीं,
बल्कि करीब 2.6% होती, जैसा कि सरकार दावा कर रही है. महंगाई को घटा दें तो
वास्तविक विकास दर लगभग शून्य रह जाती है, 7.8% के आसपास भी नहीं.”
बयान में कहा गया है, “सरकार ने सिर्फ अप्रैल-जून 2025 के आंकड़े को ही संशोधित नहीं किया है, बल्कि वित्त वर्ष 2022-23 से पिछले चार साल के आंकड़ों में भी बदलाव किया है. इसका मतलब है कि
पिछले चार सालों से जीडीपी के आंकड़े बढ़ा चढ़ा कर बताए जा रहे थे.”
बयान के
अनुसार, “चार सालों में जीडीपी को 43 लाख
करोड़ रुपये कम किया गया है. यानी 43 लाख
करोड़ रुपये की कीमत वाली अतिरिक्त वस्तुओं और सेवाओं को पहले जीडीपी में शामिल किया गया था और अब हटा
दिया गया है.
कांग्रेस
ने सरकार से इसका स्पष्टीकरण मांगा है.
कांग्रेस
के बयान में कहा गया है, “महंगाई को लेकर सरकार का अनुमान सिर्फ 2.5% है. जबकि इसी अवधि में खुदरा महंगाई 3.9% थी, जबकि थोक महंगाई 9.4% थी.”
कांग्रेस ने कहा है कि अगर वास्तविक महंगाई दर को शामिल किया जाए तो जीडीपी का आंकड़ा काफ़ी
कम हो जाएगा.
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार
के नए आंकड़े मैन्युफैक्चरिंग और खपत, दोनों क्षेत्रों में सबसे कमजोर नज़र आते
हैं.
बयान के अनुसार, “सुभाष चंद्र गर्ग के मुताबिक़,
मैन्युफैक्चरिंग पिछले साल की तुलना में 5.2%
घटा है, जबकि
निजी खपत में 5.4% की गिरावट आई है.”
बयान में कहा गया है, “भारत के जीडीपी आंकड़ों पर पहली बार सवाल नहीं उठे हैं. पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार
अरविंद सुब्रमण्यन ने बताया है कि 2005-2011 के आर्थिक उछाल वाले वर्षों में विकास दर को वास्तव में कम करके आंका
गया था. लेकिन 2011-12 में पद्धति और बेस ईयर बदलने के बाद
से विकास दर को लगातार ज्यादा बताया गया है.”
“आईएमएफ़ ने 2025 के अंत में भारत के राष्ट्रीय आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड
दिया था. इससे पता
चलता है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी आंकड़ों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं
हैं.”
कांग्रेस ने कहा कि अर्थव्यवस्था की दूसरी
तस्वीर दिखाने के लिए 7.8%
का आंकड़ा दिखाया गया.
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