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Friday, May 29, 2026

ट्रंप की ‘पाषाण युग’ की धमकी पर आईआरजीसी कमांडर ने क्या जवाब दिया – BBC News हिंदी

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James Y. Falcon
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James Y. Falcon is a digital journalist and long-form content strategist covering global sports, entertainment, education, and trending world affairs. With a strong focus on search-driven news and audience behavior, his work blends real-time trend analysis with clear, contextual reporting. James specializes in breaking down fast-moving topics—ranging from international football and franchise cricket to exam updates and pop-culture shifts—into accurate, reader-friendly narratives. His articles are designed to help readers understand not just what is happening, but why it matters in a rapidly changing digital landscape. When not tracking global trends or analyzing search data, James focuses on refining long-form journalism for modern platforms, with an emphasis on clarity, credibility, and reader trust.

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This article covers the breaking situation concerning ट्रंप की ‘पाषाण युग’ की धमकी पर आईआरजीसी कमांडर ने क्या जवाब दिया – The MediaNews हिंदी.
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दक्षिणी लेबनान हुआ इसराइली हमला

इमेज स्रोत, Abbas FAKIH / via Getty Images

इमेज कैप्शन, दक्षिणी लेबनान के एक गाँव में हुए इसराइली हवाई हमले के बाद बचावकर्मी लोगों की तलाश करते हुए (2 अप्रैल 2026 की तस्वीर)

अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी
युद्ध में मरने वालों की संख्या पाँच हज़ार से ज़्यादा हो गई है.

यह जानकारी
अलग-अलग एजेंसियों के ताज़ा आँकड़ों के आधार पर दी गई है, जिसे रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया है.

बीबीसी इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप
से पुष्टि नहीं कर पाया है.

ईरान: 3,519 मौतें

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन
एचआरएएनए के अनुसार, ईरान में मारे गए लोगों में 1,598 आम
नागरिक हैं, जिनमें कम से कम 244 बच्चे शामिल
हैं.

रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट ने
शुक्रवार को कहा कि अब तक अमेरिकी-इसराइली हमलों में ईरान में कम से कम 1,900
लोगों की मौत हुई है और 20,000 लोग घायल हुए हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन
आँकड़ों में चार मार्च को श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले में
मारे गए कम से कम 104 लोग शामिल हैं या नहीं.

लेबनान: 1,318 मौतें

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार,
मरने वालों में 124 बच्चे शामिल हैं. इसराइल ने 2
मार्च को लेबनान पर हमले शुरू किए थे और तब से हिज़्बुल्लाह के 400 से अधिक लड़ाके
मारे जा चुके हैं.

अलग-अलग घटनाओं में कम से कम नौ
लेबनानी सैनिक मारे गए हैं और यूएन पीस कीपिंग फ़ोर्स के तीन सैनिकों की भी मौत
हुई है. ये तीनों सैनिक इंडोनेशिया के थे.

इराक़: कम से कम 107 मौतें

इराक़ के स्वास्थ्य अधिकारियों के
अनुसार, मरने वालों में आम नागरिक, ईरान समर्थित शिया पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्स के
सदस्य, अमेरिका समर्थित कुर्द पेशमर्गा
लड़ाके, पुलिस और सेना के जवान शामिल हैं.

इसके अलावा एक विदेशी क्रू सदस्य की
भी मौत हुई, जो इराक़ी बंदरगाह के पास टैंकरों पर
हुए हमले में मारे गए. साथ ही ‘काउंटर
टेररिज़्म ट्रेनिंग’ दे रहे एक फ़्रांसीसी सैनिक की भी
ड्रोन हमले में मौत हुई है.

इसराइल: 19 मौतें

इसराइल की एंबुलेंस सेवा के अनुसार,
ईरान और लेबनान से दागी गई मिसाइलों से 19 लोगों
की मौत हुई है. इसराइली सेना का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में उसके 10 सैनिक भी
मारे गए. इसके अलावा, 22 मार्च को सीमा के पास एक इसराइली
किसान की भी मौत हुई, जब इसराइली सैनिकों से ग़लती से गोली
चल गई.

अमेरिका: 13 मौतें

अमेरिकी सेना के अनुसार, इराक़ में एक सैन्य रिफ़्यूलिंग विमान के
दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद छह सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है. वहीं ईरान में
ऑपरेशन के दौरान सात अन्य सैनिक मारे गए.

क्षेत्र के अन्य हिस्सों में मौतें

संयुक्त अरब अमीरात (11), क़तर (7), कुवैत (7), वेस्ट बैंक (4), सीरिया (4), बहरीन (2), ओमान (2) और सऊदी अरब (2) में भी
मौतें दर्ज की गई हैं.

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