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पश्चिम बंगाल में बारासात स्थित एक निजी अस्पताल से जुड़ी एक महिला और एक पुरुष नर्स के निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी ने उनके नमूनों की जाँच में इसकी पुष्टि की है.
इस बीच, बुधवार को दो अन्य संदिग्धों को भी जाँच के लिए कोलकाता में संक्रामक बीमारियों के अस्पताल लाया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है.
निपाह वायरस से पीड़ित एक महिला नर्स कोमा में चली गई है. जिस बारासात अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है उसके एक डॉक्टर ने बताया, “पुरुष नर्स की हालत भी गंभीर है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है.”
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने पत्रकारों को बताया, “22 साल के पुरुष और 25 साल की महिला नर्स निजी वजहों से पूर्व बर्दवान गए थे. वे इसके अलावा राज्य से कहीं बाहर नहीं गए थे. दोनों बारासात के एक निजी अस्पताल में काम करते हैं और फिलहाल वहीं उनका इलाज चल रहा है.”
दूसरी ओर, सरकार ने एहतियाती क़दम उठाते हुए कोलकाता के बेलियाघाटा स्थित संक्रामक बीमारियों के अस्पताल में बिस्तरों की संख्या बढ़ा दी है. वहां एक विशेष आइसोलेशन वार्ड खोलने का भी फ़ैसला किया गया है.
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डॉक्टरों को संदेह है कि एक नर्स को नदिया ज़िले के कालीगंज में एक पारिवारिक आयोजन में शामिल होने के दौरान यह संक्रमण हुआ था. उसके साथ काम करने वाले दूसरे नर्स को भी उसी से संक्रमण फैला.
स्वास्थ्य विभाग ने इन नर्सों के संपर्क में आने वाले क़रीब 120 लोगों की पहचान की है. उन सबको होम आइसोलेशन में रखा गया है. कालीगंज की परिस्थिति का जायजा लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक टीम बुधवार को दौरा करेगी.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब तक 45 लोगों के नमूने कल्याणी स्थित एम्स में जाँच के लिए भेजे गए हैं. उनमें से पाँच की रिपोर्ट निगेटिव आई है.
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदेव राय ने बताया, “निपाह वायरस का फिलहाल कोई इलाज नहीं है. फिलहाल परीक्षण के तौर पर दवाएं दी जा रही हैं. लेकिन वे अब तक ख़ास कारगर साबित नहीं हो सकी हैं.”
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से नहीं डरने और बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उलटी और गले में खराश जैसे संक्रमण के लक्षण नज़र आते ही चिकित्सीय सलाह लेने को कहा है.
इससे पहले केरल में साल 2018, 2019 और 2021 में निपाह के संक्रमण की खबरें आई थीं.
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