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रूस से तेल और गैस ख़रीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ़ लगाने वाले एक बिल के अमेरिकी संसद में पास होने के बाद भारत की प्रतिक्रिया बहुत सधी रही है.
अब अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि ‘ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत के लोगों की प्राथमिकता सबसे ऊपर है.’
रूस से तेल और गैस ख़रीदारों में भारत और चीन शीर्ष देशों में से आते हैं.
क्वात्रा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत के लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे पहले आती है.”
क्वात्रा ने कहा, “हमारे फै़सले उपलब्धता, किफ़ायत, बाज़ार की स्थितियों और व्यावसायिक व्यवहारिकता से तय होते हैं. भारत अपने कच्चे तेल की 85 प्रतिशत से ज़्यादा और अपनी प्राकृतिक गैस की क़रीब आधी ज़रूरत आयात करता है.”
उन्होंने कहा, “जब हालिया संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव पड़ा, तब भारत ने अपने लोगों को क़ीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचाने के लिए निर्णायक क़दम उठाए. इससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को स्थिर रखने और एक बड़े संकट को रोकने में भी मदद मिली.”
भारतीय राजदूत ने कहा, “हमारी ख़रीदारी एक मूल राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी को दिखाती है. अपने लोगों के लिए पर्याप्त, किफ़ायती और निर्बाध ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सीमाओं से बाहर विकल्प तलाशना.”
उन्होंने कहा कि भारत मध्य पूर्व, अफ़्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरेशिया और अमेरिका के विभिन्न साझेदारों से ईंधन ख़रीदता है.
उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है. फिर भी, एक औसत भारतीय की ऊर्जा खपत दुनिया के औसत के एक-तिहाई से भी कम और एक औसत अमेरिकी की खपत के दसवें हिस्से के बराबर है. हमारी ऊर्जा ज़रूरतें बढ़ेंगी और उन्हें बढ़ना भी चाहिए.”
भारतीय राजदूत ने कहा कि विश्वसनीय और किफ़ायती ऊर्जा आपूर्ति घरों, खेतों, अस्पतालों, स्कूलों, कारख़ानों और परिवहन को चलाती है, लोगों की आजीविका की रक्षा करती है और आर्थिक विकास को बनाए रखती है.
ग़ौरतलब है कि इस बिल के पास होने के बाद एक अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूस के अलावा अन्य देशों से तेल और गैस ख़रीदने की नसीहत दी थी.
चीन पहले ही अमेरिकी क़ानून को अंतरराष्ट्रीय क़ानून से अलग बताते हुए इसे मानने की बाध्यता से इनकार कर दिया है.
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