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This article covers the latest updates on शहबाज़ शरीफ़ ने मोहम्मद बिन सलमान से क्या की बात और क्या दिलाया भरोसा? – The MediaNews हिंदी.
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इमेज स्रोत, X/narendramodi
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर कई सवाल उठाए हैं.
सोशल मीडिया एक्स पर एक प्रेस नोट जारी करके कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार सवाल पूछे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाना एक बात है, लेकिन सरकार का रवैया चीन के सामने “सोची-समझी रियायत” देने जैसा दिखाई देता है.
ऑपरेशन सिंदूर
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चीन की पाकिस्तान को कथित सैन्य मदद के मुद्दे पर अपना रुख़ नरम क्यों कर लिया.
जयराम रमेश ने कहा कि 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद में चीन की भूमिका गहरी और महत्वपूर्ण थी. उन्होंने दावा किया कि यह भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान का आकलन था.
उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन की भूमिका को लेकर सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान का वास्तविक आकलन क्या है और क्या हालिया बयानों के पीछे कोई कूटनीतिक रणनीति काम कर रही है.
गलवान घाटी झड़प
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से पूछा कि 19 जून 2020 को चीन को दी गई “क्लीन चिट” क्या भारत की स्थिति को कमज़ोर नहीं करती?
उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में भारत के 20 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, लेकिन उसके बाद दिया गया बयान आज तक वापस नहीं लिया गया. यह बयान था कि “न कोई हमारी सीमा में कोई घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है.”
उनके मुताबिक इससे भारत की बाद की बातचीत और वार्ता की स्थिति कमज़ोर हुई.
लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित क्षेत्रीय बढ़त को क्यों होने दिया.
व्यापार घाटा
जयराम रमेश ने भारत-चीन व्यापार घाटे का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है और सरकार को बताना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ.
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंधों का सामान्यीकरण आवश्यक हो सकता है, लेकिन सरकार के कदमों से ऐसा लगता है कि वह चीन के प्रति बेहद नरम रुख़ अपना रही है.
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